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Doha

एक शेर

दावये इश्क़ जौहर न करता मगर, इश्क़ ने मार डाला तो मैं क्या करूं ।

भोजपुरी शेर

देके संतोष हमरा के रो देलें ऊ, बारें कबहूँ के ऊहो निशाना भइल । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

दुख-सुख मिल के भोग सखी रे । जीवन बा संयोग सखी रे।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

गुलाबी बा चेहरा,शराबी नजर बा। घटा रंग में बाटे, ठनका के डर बा।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

दू मुहाँ साप बन के जाति$बइसाखी पर कुदत बा, केहू टोकी त ओकर खैरो नइखे,अतनाआगे बा। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

शराफ़त को मेरी कमज़ोरी तुम जौहर समझते हो ? यहाँ इंसाफ होता है मुनासिब वक़्तआने पर।

आज की मीडिया

हम मीडिया वाले मरते नहीं भूको-प्यास से? अब नाली के कीड़े को भी लिख देते हैं जुगनू । (जौहर शफियाबादी)

क़ता

ऐ ज़िंदगी तुझे कभी ,हलका नहीं क्या। मैं ने कभी ज़मीर का, सौदा नहीं क्या। उसकी रज़ा के साथ हूँ ,ग़म चाहे हो खुशी, आशिक़ बना तो ईश्क़को,रुसवा नहीं क्या।। (जौहर शफियाबादी )

भोजपुरी

जो सुनता है वह प्यार की भाषा समझता है, कहता है भोजपुरी क्या, मीठी ज़बान है। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

टूटल दिल के तार बा, रूसल बा संगीत । कइसे गाईं रागनी, कइसे गाईं गीत।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

जौहर के महाभारत में खड़ा,विश्वास के अर्जुन साखी बा, कब भीष्म पितामह के शय्या हुँकार के दर्पण तक पहुँचल ।

एक शेर

वह जलवागाहे सैय्यदे आलम है दोस्तो, जिस दिल में बस गई है मुहब्बत हुसैन की। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

जौहर के महाभारत में खड़ा,विश्वास के अर्जुन साखी बा, कब भीष्म पितामह के शय्या हुँकार के दर्पण तक पहुँचल ।

एक शेर

वह जलवागाहे सैय्यदे आलम है दोस्तो, जिस दिल में बस गई है मुहब्बत हुसैन की। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

अन्हरिया रात लम्बा चाहे जतना भी घना होखे, फजिर होई चढ़ी सूरज उजाला-रौशनी तय बा । (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

ख़ुदा ख़ुद में तलाशूँ या के मंदिर और मस्जिद में ? कहो शैखो-ब्रह्मण से बचायें आस्तीं अपनी। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

विश्वासो घात$ जौहर हमरा से के ना कइलस, घाती बा ई बतावल आपन बा के बेगाना ।

भोजपुरी शेर

मेला में आदमी के बर्बाद$जिन्दगी बा, नेहिया के बा छिटाइल अचके में ताना-बाना। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

ग़मे हुसैन को सीने में पाल रखा है। यही नेज़ात का रस्ता निकाल रखा है।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

निगाहे यार में मैं हूँ,बहुत है, यही जौहर मेरा अपना पता है ।

भोजपुरी शेर

घटा,फूल,पंघट,हवा सामने बा। केहू अजनबी के,पता सामने बा।। (जौहर शफियाबादी)

Teachers day

घर्म-मजहब का जाल$ के काटत, हमहूँ अपना गुरु$ के देखी ले। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

क़ बयानी है शायरी का फन, शायरी सबको पर नहीं आती। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

ये माना मुहब्बत एबादत है लेकिन, मेज़ाजी अगर हो तो दिल से भूला दो।। (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

सज़ा तुम जो चाहो मुझे वह सज़ा दो। मगर पहले मेरी ख़ता तो बता दो ।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

कहाँ बा आज अँजोरिया कहाँ अन्हार भइल। समय के माँग पर सूरुज के बा पूकार भइल ।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

भाग जूही के आ बेला के गुलाबी मौसम, हमरा बखरा में रहल दर्द हवेली बन के। (जौहर शफियाबादी)

Teachers day

र्म-मजहब का जाल$ के काटत, हमहूँ अपना गुरु$ के देखी ले। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

हक़ बयानी है शायरी का फन, शायरी सबको पर नहीं आती। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

ये माना मुहब्बत एबादत है लेकिन, मेज़ाजी अगर हो तो दिल से भूला दो।। (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

सज़ा तुम जो चाहो मुझे वह सज़ा दो। मगर पहले मेरी ख़ता तो बता दो ।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

कहाँ बा आज अँजोरिया कहाँ अन्हार भइल। समय के माँग पर सूरुज के बा पूकार भइल ।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

भाग जूही के आ बेला के गुलाबी मौसम, हमरा बखरा में रहल दर्द हवेली बन के। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

सड़ गइल पानी नदी के,के कही । बात ई नइकी सदी के, के कही ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

बहुत खुशहाल हैं अहले वतन मीडिया का कहना है, मगर ये उजड़ी-उजड़ी बस्तियाँ कुछ और कहती हैं । (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

हमारे मुल्क का दस्तूर आज़ादी का हामिल है, मगर सच कहने पर पाबंदियाँ कुछ और कहती हैं । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

प्रशन उठ्ठी ना उठ्ठी चीँख के उत्तर बोली। तोप का मुँह पर कहिया ले कबूतर बोली ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

हमारा बाग़बाँ कहता है हरियाली है गुलशन में,वहीं ये सूखी-सूखी पत्तियाँ कुछ और कहती हैं । (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

बदलते मौसमों की शोख़ियाँ कुछ और कहती हैं । मगर इन बादलों की बिजलियाँ कुछ और कहती हैं ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

जहाँ नारी सुरक्षा की है बजती डुग-डुगी जौहर, वहीं अब बेटियों की सिसकियाँ कुछ और कहती हैं । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

केहू सावन सजवले बा आठो पहर, केहू उमड़ल घटा देखते रह गइल । (जौहर शफियाबादी)

गजल

होगइल का से का देखते रह गइल । आँख फूटल लवा देखते रह गइल ।। चान गरहन से कहिया भला घट सकल, लोग बिगड़ल हवा देखते रह गइल । केहू सावन सजवले बा,आठो पहर, केहू उमड़ल घटा देखते रह गइल । जोग- टोना भइल बे असर दर्द में, बैध आपन दवा देखते रह गइल । नेह उनकर पता झप से हथिया लेलस, बुधिया आपन पता, देखते रह गइल । केहू जौहर जिनिगिया लुटा के जीयल, केहू आपन नफा, देखते रह गइल ।

एक शेर

जो ग़ुलामे नबी होगया है,उसकी झोली में क्या-क्या नहीं है।अक़ल पर सारे पर्दे हैं लेकिन,ईश्क़ पर कोई पर्दा नहीं है।।जौहर

भोजपुरी शेर

आपन पता ना आज ले जौहर का चल सकल, पूछत बा लोग हमरा से कहवाँ निवास बा । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

मज़हब-धरम के नाम का नफरत के बिष ह, ई आज के सवाल बा लमहर जमीन पर । (जौहर शफियाबादी)

दोहा

ऊ का जानी प्रीत के, मज़हब-धर्म के सार। जे उपरे से ठीक बा , भीतर से बीमार ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

आगे हो दीन-दुनिया हो पीछे खड़ी हुई, इस शान से जीओ के ज़माना मिसाल दे। जौहर शफियाबादी

एक शेर

बड़ा रंग बा भोजपुरियो गजल में, दिया साधना के जरा देले बानी । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

हमअपना नदानी में बे-ढाँप समुझ लेनी, ओकरो के जे उपर से बस हाथ मिलावेला। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

जहब-धरम,ईमान के,पहचान$बस इहे, परहित,क्षमा-दया रहे इंसानियत के साथ। (जौहर शफियाबादी )

एक शेर

जिनको जाना था गये जायेंगे जाने वाले, जाने कब आता है जाने का बुलावा देखूँ । (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

दुनिया गिरी तो क्या हुआ,ताबे-नज़र तो है। मेरी नज़र में ज़िन्दगी, क्या है,सफर तो है।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

मनवा मरुआ गइल मोह का मेह पर, हमरो टिसुना टटा के टुअर हो गइल । (जौहर शफियाबादी)

यारी के दिन

कृष्ण जइसन सुदामा के मितवा रहे, बात पहिले के ह$ई, पुराना भइल । (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

बैठते-उठते उन्हीं का ज़िक्र हो जौहर मियाँ, ईश्क़ है तो ईश्क़ का इज़हार होना चाहिए।

एक शेर

ख़ुदा ख़ुद में तलाशूँ या के मंदिर और मस्जिद में, कहो शैख़ो-ब्रह्मण से बचायें आस्तीं अपनी। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

आवेदीं आवे जे दुनिया में कहर आवेला । हमरा हर हाल में जीये के हुनर आवेला ।। (जौहर शफियाबादी )

एक वचन

लय और गेयता कविता का अंग हैं परन्तु कविता भावों की वह सुक्षम-छुअन है जो लय या गेयता का मुहताज नहीं ।(डा0जौहर)

भोजपुरी शेर

मजहब-धरम,ईमान के,पहचान$बस इहे, परहित,क्षमा-दया रहे इंसानियत के साथ। (जौहर शफियाबादी )

भोजपुरी शेर

जौहर कारिख का घर में, आके साफ बचाले हाथ।

भोजपुरी शेर

माथ पर जेकरा कोइला ललन पीठ पर, पेट ओकरो नथुनिया उड़ा ले गइल । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

पुरान होला ना नेह कहियो,इहे पिरितिया के रीत होला, बता रहल बा दशा-दिशा के नयन से मोती उबल-उबल के । (जौहरशफियाबादी)

भोजपुरी शेर

कटाई जीभ एकरो, साँच बोलत बा इहो अब त$, पता लीं गाँव के एकरा, बताईं घर कहाँ बाटे। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

तोड़कर इसको नया लाओगे क्या, दिल मेरा कोई खिलौना तो नहीं ? (जौहर शफियाबादी)

दोहा

बहुते दामिल फूल बा, ई जिनगी क पल-पल। दिन-दिन रोजे खिसक रहल, हाथ केअमृत फल।। (जौहर शफियाबादी )

भोजपुरी शेर

प्यार पावल बड़ा भाग्य के बात ह, रूप आ रंग सारा ककहरा लगे । (जौहर शफियाबादी) जय हो मेरे पीर -गुरु की जय हो ।

भोजपुरीशेर

तीर पर हम-कमान पर बानी। हर घड़ी इमतेहान पर बानी।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

भटकती आत्माओं से परिशाँ मैं नहीं होता, मुझे मालूम है लालच की दुनिया का तमाशा सब। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

जिसको मैदाने क़यामत कह रहे हैं सब के सब , नाम उसका मुस्तफा बाज़ार हो ना चाहिए । (जौहर शफियाबादी)

शेर

बेहम्मदिल्लाह है जौहर गदाए साक़ीये कौसर, शहंशाही को जिस पे नाज़ है मेरी गदाई है ।

एक शेर

जिसे कहती है दुनिया हश्र का मैदान ए जौहर, हक़ीक़त में तमाशागाहे शाने मुस्तफ़ाई है ।

भोजपुरी शेर

धर्मsके नाम पर लड़ाई बा, लाजsसे गिर के गड़ गइल पानी । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

जब से जौहर फक़ीरी में मनवा रमल, थाट अइसन कहीं राजसी ना मिलल ।

भोजपुरी शेर

निअरे से आके अइकीं तनिको त भेद लागी, संतन का साधना के हमहूँ मिरास बानी। (जौहर शफियाबादी)

ऐतिहासिक भोजपुरी शेर

बहुत रंग बा भोजपुरियो गजल में। दिया साधना के जरा देले बानी।। (डॉ० जौहर शफ़ियाबादी)

एक शेर

इश्क़े सरवर का जौहर मुझे जब मिला, लोग हर मोड़ पर आज़माने लगे।

भोजपुरी शेर

बहुत आवेला उनका बस वफादारी ना आवेला। तबो हमरा कबो कवनो अदाकारी ना आवेला।। (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

हुस्न से आए न गुफ़्तार से ख़ुशबू आए। आदमी कहिए ,जो किरदार से ख़ुशबू आए।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

जीत-हारे के नाम जिनगी ह$, हौसला आसमान पर राखीं । (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

लगाकर आग पानी में कहीं देखी नहीं जाती, मुहब्बत बे ज़बाँ होती तो ये आलम नहीं होता। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

बात तारा के पन्दरोह में। कइसे लिख दीं बताईं भला।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

नाम से उनका जुड़ गइल बानीं, बस इहे ओढ़ना-बीछौना बा। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

कबो ऊ यात्रा के यातना से ना डरे राही, जे चलते-चलते फोड़ा गोड़ के सब फोड़ देबेला।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

दाव पर हर घड़ी चढ़ल बानी । तब हूँ दियना नियर बरल बानी।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

निगाहे यार में मैं हूँ,बहुत है, यही जौहर मेरा अपना पता है ।

एक शेर

सवेरा क्या भला होगा जहाँ में, मेरी आँखों में जो सूरज छूपा है । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

केहू सावन सजवले बा आठो पहर, केहू उमड़ल घटा देखते रह गइल । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

जब से जौहर फकीरी में मनवा रमल, थाट अइसन कहीं राजसी ना मिलल ।

भोजपुरी शेर

अब घट रहल बा रोज आके रउवो देखीं ना, मजहब-धरम के मुल्ला-पुजारी के मोल-भाव। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

तमाशा देख के भेंटी का समुंदर का लहर के, इहाँ जे डूब के उभरेला मोती बाँटेला । (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

इस शान से जीओ के ज़माना मिसाल दे, आगे हो दीन-दुनिया हो पीछे खड़ी हुई । (जौहर शफियाबादी)

दोहा

उजड़ल खोंता सामने,अंडा पर बा साँप । सारा चकना चूर बा, पंछी के अरमान।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

गाँव के प्यार जौहर ना दिल से गइल। लाख काटे के कटनीं शहर में उमर ।।

भोजपुरी शेर

आवे दीं आवे जे दुनिया में कहर आवेला । हमरा हर हाल में जीये के हुनर आवेला ।। (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

मैं ने सोचा भी नहीं था कभी ऐसा होगा । उसके चेहरे पे कोईऔर भी चेहरा होगा ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

सफिना डूबता अपना तो डूबता कैसे, तुम्हारा नाम लिया था अभी-अभी मैंने । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

बाझन के बा गोल सुगनवा। आपनो अँखिया खोल सुगनवा।। (जौहर शफियाबादी)

मुक्तक

जीवन का श्रृंगार बताओ।अब भी कुछ उपचार बताओ।मानवता भी चीज़ बड़ी है, खुलकर मेरे यार बताओ।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

शिक्षा-दिक्षा आज काल्ह बा। बनिया के दुकान हो गइल ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

लगाकर आग पानी में कहीं देखी नहीं जाती, मुहब्बत बे ज़बाँ होती तो ये आलम नहीं होता। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

बात तारा के पन्दरोह में। कइसे लिख दीं बताईं भला।। (जौहर शफियाबादी)

एगो शेर

नेता के नेत-धर्म से, मतलब कहाँ रहल, रोजे चलत बा चाल दुधारी के हाय-हाय। (जौहर शफियाबादी)

गजल

पिरितिया में धोखा कहर पीते-पीते । बिता देनी सारा उमर पीते-पीते ।। जीयत बानी हम अबले आसे-पियासे, बदल देनी रउवा नीतर पीते-पीते । उहे बन के शंकर जगत के उबारी, बहावे जे गंगा जहर पीते-पीते । कला,प्यास अँखियन में देखे के जानीं, परख लीं केहू के नज़र पीते-पीते । केहू ग्यान गंगा में पी के बा डुबल, केहू जाता नीचे-ऊपर पीते-पीते । बहुत लोग पुछेला पीहीं ले काहे, बताईं का लोरन के लर पीते-पीते? जगा देला केहू जिनिगिया के जौहर, भुला जाला केहू डगर पीते-पीते ।

दोहा

राजा जब बनिया बनी, राखी भक्त-दलाल । दूर्दिन में जनता पड़ी, अफसर लाले लाल ।। (जौहर शफियाबादी)

एक मतला,एक शेर

पलकों पे लिए हस्रते दीदार गई है । रौज़े पे तेरे नर्गीसे बीमार गई है।। लगता है मेरे फिक्ररो तसौउर के नगर में, बुढ़िया कोई फिर मिश्र के बाज़ार गई है । ( जौहर शफियाबादी )

एक मतला

हर रोज़ रोज़े ईद है ,हर शब शबेबरात, उनका करम है उनका करम ख़ैरियत से हूँ । दिल बन गया है मसकने महबुबे किब्रिया , मुँह देखते हैं, दैरो- हरम ,ख़ैरियत से हूँ ।। ( जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

राम के नाम सुन के दहल जाता दिल, दाढ़ी-टोपी,जटा देखते-देखते। (जौहर शफियाबादी)

गजल

बन गइल जल घटा देखते-देखते। हो गइल का से का देखते -देखते।। नेत आ धर्म मनई के पहचान ह$, होगइल सब कथा देखते- देखते। राम के नाम सुन के दहल जाता दिल, दाढ़ी - टोपी ,जटा देखते - देखते । लाज शर्मो कहीं खोज के देखलीं, बा भइल लापता देखते- देखते । लोग पढ़-लिख के घूसखोर-बैमान बा, आज के बा दशा देखते - देखते । धर्म-मजहब छलावा में का फर्क बा, पूँजीवादी छटा देखते - देखते ।? हम कहत बानी जौहर चलीं देखलीं, साँच में आँच का देखते - देखते ।

मतला

साँच पर बा आँच,खाली जी हजूरी बा इहाँ । चाहे जइसे होखे परिवर्तन जरूरी बा इहाँ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जौहर सस्ता जान के , प्रेम कबो मत मोल। तन-मन रखके दाव पर, मोल सके तब बोल।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जौहर दरिया आग के, प्रेम नगर कहलाय। डूब गइल से पार बा, जे पँवरे पछताय।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जौहर पिव के बात कर, जीतल बाजी हार । जे पिव के नैनन बसे, ओकर बेड़ा पार ।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

खोजनी काल्ह गाँवन में,शहरन में हम । लोग सगरी मिलल आदमी ना मिलल।। (जौहर शफियाबादी)

एकशेर

आप चुप-चाप कैसे बैठेंगे, खोटे सिक्के बहुत खनकते हैं । (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

आपन जे पेट काट के,अनकर क्षुधा भरे। उहे सरग उतारे ला, जौहर ज़मीन पर ।।

एक शेर

जिनकोअपना पता, वह देते हैं, उनकोअपना पता , नहीं होता । (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

उन दिवानों काभी कुछ तो है नक़्शे पा, जो पता पूछ कर ला पता होगये। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

तोहरा बिना बुझात$बा,चारू दिशा में अब । जिनगी उदास रात के, बासी कबो-कबो।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

जिसने की हो कभी शाहबाज़ी,उसको हक़ है करे ईश्क़बाज़ी। एक समंदर है शोलों का जौहर,इश्क़ है ये तमाशा नहीं है ।।

एक शेर

यह देश हमारा है, तहज़ीब हमारी है। मंदिर भी हमारा है, मस्जिद भी हमारी है।। (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

कबो ऊ यात्रा के यातना से ना डरे राही, जे चलते-चलते फोड़ा गोड़ के सब फोड़ देबेला।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा-गजल

ठमकल-ठमकल सांस बा,थथमल-थथमल प्यार । रउवा बिन बा जिंदगी, एक बासी अखबार ।। कलयुज- सतयुग हर समय, बाओकर जयकार । फेक दिहल जे तूड़ के,नफ़रत के तलवार ।। रवा हंस दीं हंस पड़ी, मन वीणा के तार । हमरो आँसू बन झरी, सावन के रसधार ।। रस्ता बा ऊ पा गइल, भइल ऊहे बा पार । त्याग दिहल जे प्रेम में,आपन सुख संसार ।। डाली -डाली फूल बा, पात-पात सिंगार । मिथ्या का बाजार में, बाटे रूप हज़ार ।। जौहर आँसू पोछ दे, जे अनकर हुशियार । भींग गइल बा लोर से, श्रद्धा के दीवार ।।

एगो शेर

दूध के दूध पानी के पानी करीं, तबहूँ सँच बात झूठन के झूठा लगे। (जौहर शफियाबादी)

एगो शेर

पत्थर के मोल कवनो ना लेबुल घटा सकल, काबा में याद आवेला काशी कबो-कबो। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

सच्चा सपना कर्म हS, बोले बहसे भोर। तन पुल के एह पार बा,मन पुल क ओहओर।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा-गज

ठमकल-ठमकल सांस बा,थथमल-थथमल प्यार । रउवा बिन बा जिंदगी, एक बासी अखबार ।। कलयुज- सतयुग हर समय, बाओकर जयकार । फेक दिहल जे तूड़ के,नफ़रत के तलवार ।। रवा हंस दीं हंस पड़ी, मन वीणा के तार । हमरो आँसू बन झरी, सावन के रसधार ।। रस्ता बा ऊ पा गइल, भइल ऊहे बा पार । त्याग दिहल जे प्रेम में,आपन सुख संसार ।। डाली -डाली फूल बा, पात-पात सिंगार । मिथ्या का बाजार में, बाटे रूप हज़ार ।। जौहर आँसू पोछ दे, जे अनकर हुशियार । भींग गइल बा लोर से, श्रद्धा के दीवार ।।

एक शेर

दुनिया क्या समझ पायेगी अंदाज़े मोहब्बत, आश्क़ि हूँ आँसूओं से वज़ू कर के चला हूँ। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

सूरज से हंस के काली घटाओं ने कह दिया, गर्मी किसी की सदा रहती है कब यहाँ। (जौहर शफियाबादी)

मुक्तक

मैं ने परखा है, मैं ने ढ़ाला है| आप अपने को ख़ुद सम्हाला है| ज़िंदगी खुशनुमा सी लगती है| दर्द सीने में जब से पाला है || (जौहर शफियाबादी)

क़ता

निसबतों की किरण से है रौशन जहाँ,चाँदभी चाहिये,चाँदनी के लिए।ना सही कुछभी दामन में जौहर मगर,दर्दे दिल चाहिये आदमी के लिए।।

शेर

जब वसूलों की जीत होती है, जिंदगी झूम-झूम जाती है । (जौहर शफियाबादी)

दोहा

गाँव-शहर दूनु में बा, सत्ता के जंजाल । दुष्टन के बा चौकड़ी, जाति-धर्म के जाल।। (जौहर शफियाबादी)

एगो शेर

जाने कवना सोग में डूबल बा सारा शहर आज, मयकदा वीरानS बा काली घटा होते हूए। (जौहर शफियाबादी)

दोहा-गजल

जब-जब बाजे याद के,सारंगी के तार । आँखिन से सावन धरे,तन-मन में कचनार।। सोंचत बानी अब करीं, कवने पर विश्वास । कल-बल छल के लोग बा,का जानी उपकार।। योग-वियोगी रीत के,सरधा पालनहार । मिल-जुल के सब तूड़ दीं,नफरत के दीवार।। अब बाजारू प्रेम के,लागत बा बाजार । सहयोगी स्वारथ बनल,सहभागी धिक्कार।। लैला-मजनू हीर के, कान्हा के श्रृंगार । मानवता में प्रेम के, निर्मल सूत्राधार ।। जौहर निश-दिन साधलीं, परखीं बारंबार । छोर कहाँ बा नेह के, मूल कहाँ बा यार ।।|

दोहा-गजल

कबले चलतीं हम भला, हरजाई के संग। हमरा चलहीं के रहे, एकलाई के संग ।। धोखा, कपट, कचोट के, कठिन भूलावल बात । चालाकी चल ना सके, भोलाई के संग ।। भादो के घनघोर रूत, बिजुरी, ठनका, रात । विरह-वियेग क वेदना, अँगड़ाई के संग ।। मन-मंदिर में भाव के, दीप जरल अनमोल । घाव हरा सब हो गइल, पुरवाई के संग ।। लड़िकाई के साँच बा, फजिर-फजिर के बात । हमहूँ खेलीं घाम से, अंगनाई के संग ।। जीवन मरण से कठीन, जौहर प्रेम क खेल । रउवो चल के देख लीं, चतुराई के संग ।।

दोहा

भोजपुरी भाषा अमर, मीठा-अमृत बोल। साधु-संतो, फकीर के, भाषा ई अनमोल ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

टूटल दिल के तार बा, रूसल बा संगीत। कइसे छेड़ीं रागनी, कइसे गाईं गीत।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

बेज़बाँ दर्द की देखो हिम्मत, बनके आँसू भी कुछ तो कहता है ! (जौहर शफियाबादी)

भोजपुरी शेर

विश्वास घात हमरा से के ना भला कइल S, ई भाग बा हमार कि फूटल गिलासs बा । (जौहर शफियाबादी)

क़त्ता

जिंदगी हो गई , एक प्यासी नदी। ढूँढती रह गई, ज़िंदगीभर खूशी।। (जौहर शफियाबादी )

एक शेर

मये हुब्बे नबी है दिल है और आँखें हैं मंज़र है, बला का हुस्ने फितरत है हमारे आबगिने में । (जौहर शफियाबादी)

बसंत

पग-पग पर चटकल कली, तन-मन निरखे कंत। मह-मह महकल बा छटा, आइल आज बसंत। (जौहर शफियाबादी )

दोहा

तन के दुनिया और बा, मन के दुनिया और । जाँचीं-परखीं देखलीं, करके पल भर गौर।। (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

हमर तहरा से अचके भइल प्यार बा, एह में नाराज भइला के का बात बा । पूछ के कहिया बरिसे ले कारी घटा, एह में नाराज भइला के का बात बा।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जुल्म से टक्कर लेत म, बरिसल जहवाँ आग । होखत बा ओ देश में, अब दरबारी राग।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

राजनीत के दाव में, होता नंगा नाच । जुमला बाजी बा बनल , आज समय के साँच । (जौहर शफियाबादी)

दोहा-गजल

वाणी अमृत नेह के, मीठा जेकर गीत । ऊ जग में धनवान बा, होला ओकर जीत ।। सौ रंगन में जग मिले, भावे भींगे रंग । साजन रंग दे आप में, रखके अपने संग ।। प्रेम पिया के राह हs, सच्चाई हs प्रीत । ऊ जग में............................... ...।। प्रीतम के खोजी करे, जंगल-जंगल जाए । अपना में जे झाँकले, उहे पता पा जाए ।। छेड़ी मन के साज अब, गाई मन के गीत । ऊ जग में.................................... ।। हीरा-मोती खाक जस, धन सच्चा सोहाग । माथा टेकल नेह पर, होला अनहद राग ।। सच्चा प्यार जे पा सकल, पावल मन के मीत । ऊ जग में .....................................।।

दोहा

साधुअन के साधु मिले, चोरन के सब चोर। सब के आपन साथ बा, कोयल, कौआ, मोर ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

दिल के अंदर चोर बा, मुंह पर बा मुस्कान । ओढ़ के चोला संत के, घूमत बा शैतान ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

जो अपना दिल से होता है, वह मरते दम तक होता है ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

मुहब्बत के हंसी लमहों की एक-एक बात रहने दो, विदाई तो जुदाई है मगर सौग़ात रहने दो। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

बिन वाणी वक्ता बने, आँसू दिन आ रात । गिर-गिर के सच-सच कहे, सारा दिल के बात।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

कहो बादलों से ज़रा मुस्कुरायें, ज़मीं आसमाँ की कहानी कहेगी । (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

अब के जिनगी बनल अखबारSआवारा बादल। नेह-नाता बचल ना प्यारS आवारा बादल।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

जिसको मैदाने क़यामत कह रहे हैं सब के सब, नाम उसका मुस्तफा बाज़ार हो ना चाहिए । (जौहर शफियाबादी)

दोहा

सहज-सरल रस-भाव के, सच्चा-सच्चा बोल। भोजपुरी भाषा पढ़ीं, जग में बा अनमोल।। (जौहर शफियाबादी)

मुक्तक

रहनुमा ख़ुद में पड़ा है क्या कहूँ , राह में कोहरा घना है क्या कहूँ । एक-दो हों तो सुनाऊँ मुश्किलें, सामने पर्वत खड़ा है क्या कहूँ ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

जिसको मैदाने क़यामत कह रहे हैं सब के सब, नाम उसका मुस्तफा बाज़ार हो ना चाहिए । (जौहर शफियाबादी)

दोहा

सुंदर सपना जाल बा, ई छलिया संसार । लालच में जग-मग लगे, अँधियारो उजियार ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जौहर साधीं आप के, जस चंदन आ धूप । बासे बसिया फूल में, ना ख़ुशबू ना रूप ।।

एक शेर

ग़म न कुछ रोज़े-जज़ा का और न इसयाँ का ख़ौफ, फैसला जौहर ने छोड़ा है रसूले पाक पर।

दोहा

राजनीति के दाव में, होता नंगा नाच । जुमला बाजी बा बनल, आज समय के साँच।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जौहर खेती प्रेम के, होला सब दिन साँच। रोके से फल ना रुके, साँच न लागे आँच ।। (जौहर शफियाबादी)

एगो मतला

अच्छा-खासा खेल- तमाशा,हमका जानीं। उलटा-सीधा तहरे लिला,हमका जानीं।। (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

कहीं बबूर के पतई कहीं चिनार के पत्ता । धधक रहल बा अब देखीं ना देवदार के पत्ता।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

छहकल-छहकल चल पड़ल, जब मन उनकर यार। बदलल-बदलल सब मिलल, अपनन के व्यवहार।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

बुंद सेवाती के पड़े, ना अनइस ना बीस । मोती ढाले सीप त$, सर्प बनावे विष$।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जइसे ओस बा फूल प, पल भर क मेहमान । जौहर एह संसार में, तू अपना के जान।। (जौहर शफियाबादी)

एक मतला

सपना कबो फूलाइल,पतझर बहार होइत। कुछ हमरो प्यार$उपजित,कुछ तहरो प्यार होइत। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

निर्धन के फुटपाथ पर, मजगर आवे नीन। संकट बा धनवान पर, जागे सोंचे तीन।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जाति धर्म के नाम पर, माँगत बाटे ओट । अइसन घटिया सोंच से, देश क लागी चोट।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

पग-पग पर पसरल इहाँ,असमंजस केचोर।झर-झर सबकर झर रहल,आँखिन भर-भर लोर। ।(जौहर शफियाबादी)

दोहा

आलस घाती रोग ह$, ना डाली ना फूल । जे आलस में पर गइल, दर-दर चाटी धूल।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

जो चाहे आके देखले, तस्वीरे ज़िंदगी, जौहर मैं आईना हूँ छुपाने से फायदा ।

एक शेर

जिसको अपना पता वह देते हैं उसको अपना पता नहीं होता ।

एकशेर

आप चुप-चाप कैसे बैठेंगे, खोटे सिक्के बहुत खनकते हैं । (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जन्म-जन्म के साधना, अच्छा-खासा रंग । अँखिगर पढ़ लेला सजी, मुखड़ा-मुखड़ा रंग।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

भय बाधा बिधना हरे, विधिवत हो हर काम । अल्ला-अल्ला हम जपीं, तू भज सीताराम ।। (जौहर शफियाबादी

एक शेर

वह जो होगा रोज़े महशर मुझे सब पता है जौहर, ग़मे मुस्तफा सलामत तो लटर-पटर नहीं है ।

एक शेर

इज़्ज़त से बुलाए जाते हैं,महफिल में सजाए जाते हैं।इन शहरों में सँच कहने वाले,सूली पे चढ़ाए जाते हैं।।

एक शेर

आज संकट में बाटे सभी आदमी,का कहीं ना कहीं।। जइसे-तइसे कटाता इहाँ जिंदगी,का कहीं ना कहीं।। (जौहर शफियाबादी)

एगो शेर

आपन जे पेट काट के अनकर छुधा भरे, उहे सरग उतारे ला जौहर ज़मीन पर।

एक शेर

छू लिया है किसी फनकार के हाथों ने इसे, वरना पत्थर भी कोई ताजमहल होता है । (जौहर शफियाबादी)

गजल

रूप कतहीं उधार ना पइबs । शीशा पइब श्रृँगार ना पइबs ।। पेन्हला-ओढ़ला से ना सजबs । राग छुअले उतार ना पइबs ।। भूत भाँवर ह रेत के सागर । कतनो घूमs किनार ना पइब ।। रूप पर रंग पर गिरल छोड़s । टीस उभरी बिसार ना पइबs ।। जोग जिनगी के जान लsजौहर । प्रीत के, यार, पार ना पइबs ।।

गजल

लाजवन्ती कली के बात करीं । का-का उनका गली के बात करीं ।। चाँद -सूरज उगा के देखीं ना । आज कुछ खलबली के बात करीं ।। प्रेम के गावँ में टोला कइसन । कवना-कवना छली के बात करीं ।। साँच जाने -सुने के दिल चाहीं । आज नारी-बली के बात करीं ।। अब ले बाटे भरम के आग जहाँ । धाह में दल-दली के बात करीं ।। ज्योति जौहर जगा के जिनगी के । अबका चाला -चली के बात करीं ।।

मुक्तक

ज़िदंगी है मेरी। एक प्यासी नदी। ढूंढती रह गई, मौसमों की खूशी। (जौहर शफिया.)

एक शेर

न सही कुछभी दामन मेें जौहर मगर, दर्दे दिल चाहिए आदमी केे लिये ।

दोहा

अब बा सड़क से संसद तक, सच्चाई लाचार कबिरा । (जौहर शफियाबादी)

दोहा

मैंने किया न ज़िक्र कभी बेवफाई का । दामन कभी न छोड़ा मगर पारसाई का ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

संतोष हम करीले दिलासा के बा लकम । अँजुरी में अपना आँख के मोती बटोर के ।।

एक शेर

छोड़ीं धरती के आसमान के बात। अब कहाँ बा इहाँ ईमान के बात।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

खिल्ली उड़ा रहल बा ऊ हमरा लिलार के । चमकत बा जेकरा माँग में सेंदूर उधार के ।। (जौहर शफियाबादी)

शेर

इतिहास माफ आप को अब कर सकेगा क्या, खुश हो रहे हैं आज जो पत्थर उछाल कर ? (जौहर शफियाबादी)

दोहा

काल्ह के रावण त इहाँ, जर जाला हर साल । आज क रावण के कहाँ, बांका होता बाल ।। (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

छोड़ीं धरती के आसमान के बात। अब कहाँ बा कहीं ईमान के बात।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

सारा जग बैरी बनल, जब आइल पहचान। साँच बताईं फूल की, पत्थर हSइंसान ।।

एगो शेर

खुलेआम दिन-रात बिकाता,ई का होता। महंगा-सस्ता बात बिकाता,ई का होता? (जौहर शफियाबादी)

दोहा

मनई का मन में रहो, क्षमा-दया के मान । तबहीं ऊ बन पा सकी, एक अच्छा इंसान ।।

दोहा

सच्चाई फिंका पड़ल, रजगज करे लबार । गाँव में अपना आज बा, लबरन के बाजार ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

देश भइल बे खेत बा, जनता कोसे भाग। मीडिया के बा नाम प, बस दरबारी राग ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

जबले बाटे रंग जमे, एक दिन होई उघार । कौआ बा बगुला बनल, लेके पंख उधार ।। (जौहर शफियाबादी)

मुक्तक

जीवन का श्रृंगार बताओ।अब भी कुछ उपचार बताओ।मानवता भी चीज़ बड़ी है, खुलकर मेरे यार बताओ

दोहा

सारा जग बैरी बनल, जब आइल पहचान। साँच बताईं फूल की, पत्थर हSइंसान ।।

एगो शेर

खुलेआम दिन-रात बिकाता,ई का होता। महंगा-सस्ता बात बिकाता,ई का होता? (जौहर शफियाबादी)

एक शेर

यह देश हमारा है, तहज़ीब हमारी है। मंदिर भी हमारा है, मस्जिद भी हमारी है।।

दोहा

पत्ता-पत्ता सोग में, डाल-डाल हलकान। छीनत बा पापी कवन, बगिया के मुस्कान ।। (जौहर शफियाबादी)

doha

देश प्रेम के रूप बस, जनता से हो प्यार । धर्म-वर्ग के नाम ना, एक जस हो व्यवहार ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

पत्त-पत्ता सोग में, डाल-डाल हलकान। छीनत बा पापी कवन, बगिया के मुस्कान ।। (जौहर शफियाबादी)

कता

मेरे माहौल का हर रसमे दिल बेदार हो जाए। एनायतआप की गरअहमदे मुख़्तार हो जाए।। जहाँने रंगोबू की मुझको कुछ हाजत नहीं लेकिन, मुहब्बत आप की मेरे गले का हार हो जाए ।।

मुक्तक

तुमने पर्वत कब देखा है। तुमहीं बोलो जब देखा है। उतना उँचा तुम जाओगे? कहते हो की सब देखा है ।। (जौहर शफियाबादी)

शेर

मजदूरन के खून-पसेना, बनके फल आ फूल झरेला ।

दोहा

पत्त-पत्ता सोग में, डाल-डाल हलकान। छीनत बा पापी कवन, बगिया के मुस्कान ।। (जौहर शफियाबादी)

दोहा

सबका खुदा ईश्वर एक है। वह सामान रूप से बिना जाति-धर्म-वर्ग देखे सब पर कृपा करता है।

दोहा

तोता मिर्ची खाई के, बोले मीठी बोल । मनई मीठा खाए पर, बोले जस विष घोल तोता मिर्ची खाई के, बोले मीठी बोल । मनई मीठा खाए पर, बोले जस विष घोल तोता मिर्ची खाई के, बोले मीठी बोल । मनई मीठा खाए पर, बोले जस विष घोल तोता मिर्ची खाई के, बोले मीठी बोल । मनई मीठा खाए पर, बोले जस विष घोल

Baridi

Khwaja Mohammad Imamuddin Nizami reverently known as Dr. Jauhar Shafiyabadi. Dr. Jauhar Shafiyabadi got his ‘Takhallus’ or pen name ‘Jauhar’ (Jauhar means ‘Talent/Skill/Art’) by his Peer-o-Mursheed or spiritual master .